लोगों को सबसे पहले रंग याद रहता है, कभी-कभी ख़ुशबू भी। फूल उस चीज़ का पता देते हैं जो अपने सबसे अच्छे रूप में है और ज़्यादा देर नहीं टिकेगी।
फूलों के बारे में लोगों को सबसे पहले रंग याद रहता है, और कभी-कभी ख़ुशबू, जो इसलिए ध्यान खींचती है कि सपनों में गंध का ज़िक्र वैसे बहुत कम होता है। पुरानी समझ में फूल उस चीज़ का पता देते हैं जो अपने सबसे अच्छे रूप में है और थोड़ी देर के लिए है, इसीलिए व्याख्याकार उन्हें लगाव, क़द्र और ऐसे लम्हों से जोड़ते हैं जो इस शक्ल में देर तक नहीं ठहरते।
पढ़ने का ज़्यादातर काम फूलों की हालत करती है। खिलती कलियाँ किसी चीज़ के शुरू होने का पाठ पाती हैं, मुरझाना और पंखुड़ियों का झड़ना उस ध्यान का जो किसी सँभाली हुई चीज़ से हट गया हो, और कटे हुए फूल ऐसी ख़ूबसूरती का जिसे इस शर्त पर लिया गया हो कि वह टिकेगी नहीं। दिया या लिया हुआ गुलदस्ता पाठ में एक और इंसान ले आता है, और व्याख्याकार सबसे पहले यही पूछते हैं कि वह किसके हाथ से आया। ज़मीन में उगे फूल गुलदान में रखे फूलों से अलग पढ़े जाते हैं, कहीं ज़्यादा किसी जड़ जमी चीज़ के पास, भेंट की गई चीज़ के नहीं।
फूलों के प्रतीक उन साफ़ मिसालों में हैं जहाँ पाठ किसी संस्कृति का होता है, पूरी दुनिया का नहीं। सफ़ेद कुछ देशों में शादी का रंग है और कुछ में मातम का। गेंदा, गुलदाउदी, लिली और कार्नेशन, इन सबके अर्थ सरहद पार करते ही पलट जाते हैं। जो कोश तुम्हें हर रंग के बदले एक तयशुदा चाबी थमा देता है, वह चुपचाप यह मान लेता है कि तुम्हारा घर वहीं है जहाँ उसका लिखने वाला रहता था।
फूल सपने में बिलकुल आम रास्तों से आते हैं: कोई बग़ीचा जिसके पास से तुम्हारा रास्ता गया, कोई शादी, अस्पताल का कमरा, कोई सालगिरह, किसी के जाने का दिन। मौक़ों से इतने बँधे होने की वजह से सपना अक्सर फूल की नहीं, उस मौक़े की तरफ़ इशारा करता है। तुम्हें आख़िरी बार फूल किसने दिए थे, या तुमने आख़िरी बार कब उठाए थे, यह याद प्रजातियों और उनके कहे जाने वाले संदेशों की किसी भी सूची से ज़्यादा बताएगी।


