मोमबत्ती वह रोशनी है जिसे कोई सँभाल रहा हो, और परंपरा मोम से कहीं ज़्यादा लौ, हवा और बुझने के पल को पढ़ती है।
सपने की मोमबत्ती एक छोटी रोशनी है जिसे किसी न किसी को सँभालना पड़ता है। यही कमज़ोरी उसका सारा पुराना अर्थ ढोती है: उम्मीद, याद या ध्यान, जो तभी तक टिकता है जब तक कोई उसकी हिफ़ाज़त करे। इसीलिए पुराने पाठ में मोम से कहीं ज़्यादा वज़न लौ की हालत का है।
मोमबत्ती जलाने को आमतौर पर किसी सोचे-समझे काम की शुरुआत माना जाता है, ऐसा इरादा जो ऐलान के बिना दुनिया में रखा गया हो। सीधी और स्थिर लौ साफ़ नज़र से जोड़ी जाती है। हवा में काँपती लौ का प्रचलित पाठ यह है कि ध्यान कई तरफ़ से एक साथ खींचा जा रहा है। सबसे बदनाम तस्वीर लौ के बुझ जाने की है, जिसे किसी कोशिश या किसी दौर के ख़त्म होने की तरह पढ़ा गया, और यह साफ़ कह देना ज़रूरी है कि कोई भी परंपरा इसे किसी के जीने या मरने की ख़बर नहीं मानती।
जहाँ भी मोमबत्ती होती है वहाँ वह गुज़र चुके लोगों के लिए, गुमशुदा लोगों के लिए और इंतज़ार के लिए जलाई जाती है, और यह बात किसी एक धर्म की नहीं है। इसीलिए ऐसे सपने बरसी के आसपास, घर में किसी की बीमारी के दौरान और किसी नुक़सान के बाद वाले हफ़्तों में ज़्यादा आते हैं। बहुत लोग बताते हैं कि वे अँधेरे घर में मोमबत्ती लेकर चल रहे थे, और इस रूप को डर की तरह नहीं, बल्कि इस तरह पढ़ा जाता है कि बाक़ी सब सो रहे हैं और किसी नाज़ुक चीज़ की हिफ़ाज़त तुम्हारे ज़िम्मे है।
मोमबत्ती पर परवरिश का इतना बोझ है कि आम अर्थ अकेले लगभग बेकार हो जाता है। किसी के लिए यह जन्मदिन है, किसी के लिए बिजली का जाना, और किसी के लिए वह रीत जिसमें वह पला और जिसे शायद आज भी निभाता हो, शायद नहीं भी। तुम्हारी नींद ने इनमें से जिसे उठाया, गिनती उसी की है।


