सपने में इंद्रधनुष देखना

सपनों में कम आने वाला दृश्य, और ऐसा जिससे लोग सोने के वक़्त से बेहतर मूड में जागते हैं, और यही बात इसके पाठ को बनाती रही।

सपनों में जितना मौसम आता है, उसमें इंद्रधनुष सबसे कम बार आता है और सबसे प्यार से याद रखा जाता है। पढ़ने की परंपरा इसमें मेल-मिलाप देखती है: कोई कठिन दौर जो बीत चुका, दो हालतों के बीच डला हुआ पुल, और वह राहत जो सच्ची तो है पर छोटी है। उसका जल्दी मिट जाना अर्थ बिगाड़ता नहीं, अर्थ का हिस्सा है, क्योंकि इंद्रधनुष के ठहरने की उम्मीद कोई नहीं रखता।

दो हालतें एक साथ

इंद्रधनुष बनने के लिए बारिश और धूप, दोनों एक ही वक़्त चाहिए, एक के बिना दूसरा बेकार है। एक-दूसरे से कटी हुई कई परंपराएँ इसी बात पर पहुँचीं, इसीलिए यह निशानी झगड़े के ख़त्म होने, दो पक्षों के आख़िरकार आमने-सामने बैठने और टिक जाने वाली किसी सुलह की बातचीत में लौटती रहती है। कई जगह इस मेहराब को ज़मीन और आसमान के बीच का रास्ता कहा गया है। इन कहानियों को इतिहास की तरह जानना अच्छा है, ये उन्हीं समाजों की चीज़ हैं जिनमें बनीं, किसी एक साझा सच्चाई की नहीं।

ठीक पहले क्या हुआ था

सपने का पाठ अक्सर उसी से तय होता है जो इंद्रधनुष से पहले घट चुका था। तूफ़ान गुज़र जाने के बाद उभरे तो वह सबसे जाना-पहचाना रूप है: मुश्किल ख़त्म, मौसम खुलता हुआ, रंग वापस। सूखे और चमकीले सपने के बीच में उभर आए तो पाठ सजावट की तरफ़ झुक जाता है, राहत से ज़्यादा ख़ुशी की तरफ़। फीका, टूटा या आधा बना हुआ इंद्रधनुष ज़्यादातर उन लोगों की कहानियों में मिलता है जिनके भीतर उम्मीद तो है पर अभी पूरा यक़ीन नहीं आया।

तुम्हारी अपनी ज़िंदगी में इंद्रधनुष जिस चीज़ का निशान बन चुका है, वही कच्चा माल है जिससे सोया हुआ दिमाग़ यह दृश्य गढ़ता है: फ़्रिज पर चिपकी बच्चे की ड्राइंग, कोई तस्वीर, या एक ख़ास दोपहर जो कभी भूली नहीं। यह निजी परत किसी भी निशानी वाली सूची से ऊपर बैठती है और इसे सबसे पहले पढ़ा जाना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या सपने में इंद्रधनुष क़िस्मत खुलने की निशानी है?
ध्यान से देखो तो यह निशानी किसी भविष्यवाणी की तरह नहीं चलती। परंपरा यहाँ किसी घटना का नहीं, एक मन की हालत का ज़िक्र करती है, और वह हालत है मुश्किल के बाद मिलने वाली राहत। सपनों की आगे की बात बताने वाली कोई सिद्ध ताक़त नहीं है, यह दृश्य भी उसका अपवाद नहीं।
देखते-देखते इंद्रधनुष मिट जाए तो?
लोगों को यह उदास कर देता है, पर अर्थ लगाने वाले इस मिटने को अपशकुन नहीं, सामान्य मानते हैं। ग़ायब होता हुआ मेहराब वही कर रहा है जो इंद्रधनुष हमेशा करते हैं, और इसकी चर्चा राहत के अस्थायी होने की तरह होती है, किसी चीज़ के छीन लिए जाने की तरह नहीं।

मिलते-जुलते सपने