टक्कर को पुराने पाठ चेतावनी नहीं, हाथ से रफ़्तार निकल जाने की तस्वीर मानते हैं, और सपने के भीतर लगी चोट को पूरी तरह प्रतीक माना जाता है।
टक्कर से जागने पर शरीर में जो सिहरन बची रहती है वह आधी सुबह तक साथ चलती है, इसलिए शुरू में ही कह देना ठीक है कि व्याख्या की परंपरा इस दृश्य को सड़क की चेतावनी नहीं मानती। सपने की दुर्घटना को लगभग हर जगह क़ाबू छूटने की तरह पढ़ा गया है: जागती ज़िंदगी में कोई चीज़ इतनी तेज़ चल रही है कि तुम्हारा हाथ उसे मोड़ नहीं पा रहा। दूसरा आम पाठ सीधा टकराव है, यानी दो ताक़तें, दो लोग या दो योजनाएँ ऐसी जगह मिल गईं जहाँ कोई पीछे हटने को तैयार नहीं।
तीन सवाल सबसे पहले आते हैं। सपने में तुम्हारी जगह कहाँ थी: पहिए के पीछे, बग़ल की सीट पर, या फ़ुटपाथ पर? स्टीयरिंग पर हाथ था या नहीं, यही पूरे पाठ की जान मानी जाती है, क्योंकि सवारी वाला सपना और चलाने वाला सपना लगभग हर पुरानी किताब में अलग वज़न रखते हैं। इसके बाद यह पूछा जाता है कि टक्कर किससे हुई, क्योंकि दीवार, दूसरी गाड़ी और किसी जानवर से टकराने के लिए सदियों में अलग-अलग पाठ बने। आख़िर में यह कि कोई घायल हुआ या नहीं, और यहाँ परंपरा एक ही सुर में कहती है कि चोट प्रतीक है और किसी की सेहत के बारे में कुछ नहीं बताती।
गाड़ी और सफ़र आज चलती हुई ज़िंदगी का सबसे आसान चित्र हैं, इसलिए जब नींद को यह कहना होता है कि दिशा में कुछ गड़बड़ है तो वह सड़क उठा लेती है। यही वजह है कि ऐसे सपने बड़े बदलावों के आसपास बढ़ जाते हैं: नई नौकरी, घर बदलना, या कोई रिश्ता जिसने अचानक रफ़्तार पकड़ ली हो। नींद के पास रफ़्तार का जो सबसे जाना-पहचाना चित्र होता है वह उसी को उठाती है और फिर तोड़ देती है।
तब सपना दूसरी ही चीज़ है और कोश के पास कहने को बहुत कम बचता है। डरावनी घटना का नींद में लौट आना उससे उबरने का जाना-पहचाना और आम हिस्सा है, और तस्वीरें हूबहू भी हो सकती हैं और बिलकुल उलझी हुई भी। ज़्यादातर लोगों में ये कुछ हफ़्तों में हल्की पड़ जाती हैं। अगर न पड़ें और लंबे वक़्त तक तुम्हारी नींद तोड़ती रहें तो डॉक्टर को बताना ठीक है, अर्थ जानने के लिए नहीं, नींद के लिए। जो रोज़ी के लिए गाड़ी चलाता है और जिसने कभी लाइसेंस ही नहीं लिया, वे एक ही टक्कर को एक तरह नहीं पढ़ेंगे, और सड़कों के साथ तुम्हारा अपना हिसाब इस पन्ने से ऊपर है।


