ज़्यादातर वह इंसान जिससे बरसों बात नहीं हुई, या कोई जिसकी शक्ल मेल नहीं खा रही थी और फिर भी पता था कि यह दोस्त है। दोनों आम हैं।
इन सपनों के बयानों में दो बातें बार-बार लौटती हैं: या तो दोस्त वह निकला जिससे बरसों से बात नहीं हुई थी, या शक्ल उसकी अपनी नहीं थी और फिर भी भीतर से यह तय था कि यही दोस्त है। दोनों बिलकुल आम हैं। इस तस्वीर को पुराने पाठों में नज़दीकी और भरोसे पर की गई टिप्पणी माना जाता है, किसी के बारे में आई हुई ख़बर नहीं।
जिन लोगों से बहुत समय से संपर्क नहीं है, उनके सपने बेहद आम हैं और उनसे उन लोगों के बारे में कुछ भी नहीं पता चलता। याद इस हिसाब से नहीं सजी होती कि किसे कब देखा था, बल्कि जोड़ों के हिसाब से, और एक गंध, एक गली या एक गाना पूरे ज़माने को रात में वापस ले आने के लिए काफ़ी है। व्याख्याकार लौटे हुए दोस्त को उस दौर की तरह पढ़ते हैं जिससे वह जुड़ा है: तब तुम्हारा हाल कैसा था, और उसमें से क्या है जिसकी अब कमी खटकती है।
दोस्त का साथ छोड़ देना, अलग कर देना या धोखा दे देना इसके ज़्यादा तकलीफ़देह रूपों में है और सबसे ज़्यादा खोजे जाने वालों में भी। यह इस बात का सबूत नहीं है कि उसने कुछ किया है। आम पाठ तुम्हारी अपनी उस अनिश्चितता का है कि तुम्हारी जगह कहाँ है, जो एक बिलकुल अच्छी दोस्ती के भीतर भी हो सकती है, ख़ासकर नई दोस्ती में या ऐसी में जिसकी शक्ल हाल में बदली हो। ऐसा सपना शिकायत बनाकर दोस्त के सामने रखने से सच्ची दोस्तियाँ बिगड़ चुकी हैं, और यहाँ लिखी कोई भी बात ऐसा करने के हक़ में नहीं है।
कुछ लोग एक ऐसे साथी का ज़िक्र करते हैं जो कई सपनों में चलता रहता है और कभी-कभी असल ज़िंदगी के किसी इंसान से मेल ही नहीं खाता। पुराने स्रोत इस आकृति को सपना देखने वाले के भीतर के सहारा देने वाले हिस्से की तरह लेते थे। यह ढाँचा तुम्हारे काम आता है या नहीं, यह तुम पर और उस दोस्ती पर है, क्योंकि एक ही शब्द के नीचे वह साथी भी आता है जो दफ़्तर में अच्छा लगता है और वह भी जो तीस बरस से तुम्हें जानता है, और कोई पन्ना यह नहीं जान सकता कि सपने में इनमें से कौन आया था।


