सपने में झरना देखना

गरज पहले याद आती है, पानी बाद में। परंपरा गिरते पानी को उस एहसास की तरह लेती है जिसे आख़िरकार बहने की छूट मिल गई।

झरने का सपना सुनाने वाला पानी से पहले आवाज़ बताता है। वही गरज, और किसी ऐसी चीज़ के पास खड़े होने का एहसास जिसे रोका नहीं जा सकता, लगभग हर पाठ की नींव है। इस दृश्य को बहुत पहले से छूट की तरह पढ़ा जाता रहा है, यानी वह एहसास जो कुछ समय रोके रखा गया और अब कहीं जा रहा है, ऐसी रफ़्तार से जो किसी के चुनने से तय नहीं हुई।

तबाही नहीं, छूट

पुरानी किताबें इसे बाढ़ से साफ़ अलग करती हैं। बाढ़ ग़लत जगह पहुँचा हुआ पानी है। झरना ठीक वहीं जाता पानी है जहाँ वह हमेशा से जाता आया है, बस उसकी तेज़ी डराती है। यही फ़र्क़ है जिसकी वजह से गिरते पानी को आमतौर पर राहत माना जाता है, कभी-कभी हद से भारी पड़ने वाली राहत, बरबादी नहीं। उसके नीचे खड़े होने का सपना देखने वाले बहुत से लोग बताते हैं कि उठने पर थकान थी पर बोझ हल्का था, जो इस पुराने पाठ से भी मेल खाता है और इस सादी बात से भी कि सबसे चमकीले सपने रात के आख़िरी हिस्से में आते हैं।

देखना, नीचे खड़े होना, ऊपर से गिरना

झरने से कहीं ज़्यादा फ़र्क़ इससे पड़ता है कि तुम्हारी जगह कौन सी थी। किसी दूर की जगह से देखना आमतौर पर उस एहसास की तरह लिया जाता है जिसे मान तो लिया गया पर ठीक से महसूस नहीं किया गया। सीधे उसके नीचे खड़ा होना देखने वाले को उस सबके बीच रख देता है जो हिल रहा है। किनारे से नीचे चले जाना रिवायती तौर पर काबू छूटना कहा जाता है, हालाँकि हैरानी की बात यह है कि इसे देखने वाले बहुत से लोग डर नहीं, एक तरह का जोश बताते हैं, और उनका अपना एहसास उस लेबल से भारी पड़ता है।

वे झरने जहाँ तुम्हारा सचमुच जाना हुआ है

जो किसी असली झरने के नीचे खड़ा हो चुका है वह वही दिन सपने में साथ लाता है, और वह किसी किताब के जोड़े हुए मतलब से आगे निकल जाता है। जिसने शादी के बाद की छुट्टी वहीं बिताई हो उसके लिए तस्वीर ख़ुशी है। जो पास की गीली चट्टान पर फिसला हो उसके लिए घबराहट। जो जोड़ तुम्हारे भीतर पहले से बना है, नींद सबसे पहले उसी को उठाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या झरना सपने में अच्छा माना जाता है?
यह परंपरा तस्वीरों को क़िस्मत के अच्छे और बुरे ख़ानों में क़रीने से नहीं रखती, और गिरते पानी को हरकत मानती है, नसीब नहीं। वह हरकत भली लगेगी या निचोड़ देगी, यह इस पर है कि रोककर क्या रखा गया था।
सूखा हुआ झरना दिखे तो उसका क्या पाठ है?
सूखा झरना कहीं कम आने वाली तस्वीर है और उसके लिए विरासत में मिले पाठ पतले हैं। जो हैं वे उस राहत की तरफ़ इशारा करते हैं जिसकी उम्मीद थी और जो आई नहीं, पर इतनी कम आने वाली चीज़ में तुम्हारा अपना असर बेहतर रहनुमा रहेगा।

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