चीनी राशिचक्र के साल कैसे चलते हैं

जानवर वाला साल 21 जनवरी और 20 फ़रवरी के बीच किसी दिन बदलता है, 1 जनवरी को नहीं, इसलिए जनवरी और फ़रवरी की शुरुआत के जन्मदिन ध्यान माँगते हैं।

चीनी राशिचक्र में जानवर पूरे एक साल का होता है, पर वह साल 1 जनवरी को शुरू नहीं होता। वह चीनी नए साल की उस अमावस्या पर खुलता है जो 21 जनवरी और 20 फ़रवरी के बीच कहीं पड़ती है, इसलिए जनवरी में और फ़रवरी के पहले पंद्रह दिनों में जन्मे लोग आमतौर पर पिछले बरस वाले जानवर के होते हैं। जनवरी 2025 में पैदा हुए बच्चे को अगर साँप बताया गया है तो उसे ग़लत जानवर पकड़ा दिया गया है: साँप का साल 29 जनवरी 2025 को शुरू हुआ, और उससे पहले ड्रैगन ही चल रहा था।

बारह जानवर और हर एक का एक साल

क्रम कभी नहीं बदलता और कड़ी कभी नहीं टूटती। नीचे हर जानवर के सामने उसका एक हाल का साल लिखा है। इसमें 12 जोड़ते या घटाते जाओ, या 12 का कोई भी गुणा, और उसी जानवर के बाक़ी साल हाथ आ जाएँगे।

  • चूहा। 2020
  • बैल। 2021
  • बाघ। 2022
  • खरगोश। 2023
  • ड्रैगन। 2024
  • साँप। 2025
  • घोड़ा। 2026
  • बकरी। 2027
  • बंदर। 2028
  • मुर्गा। 2029
  • कुत्ता। 2030
  • सूअर। 2031

इस सूची का हर साल चीनी नए साल से गिना जाता है, और यही वह एक बात है जहाँ ज़्यादातर लोग चूक जाते हैं। बकरी को कहीं भेड़ या मेढ़ा लिखा मिलेगा और सूअर को कहीं जंगली सूअर, क्योंकि चीनी शब्द उन जानवरों को एक ही नाम में समेट लेते हैं जिन्हें दूसरी भाषाएँ अलग रखती हैं।

साल सर्दी के आख़िर में क्यों बदलता है

चीनी कैलेंडर चाँद और सूरज दोनों को साथ लेकर चलता है। महीना अमावस्या के दिन से शुरू होता है, यानी उस दिन से जब चाँद हमारे और सूरज के बीच पड़ जाता है और उसका रोशन चेहरा हमारी तरफ़ नहीं रहता, और वह महीना अगली अमावस्या तक 29 या 30 दिन चलता है। ऐसे बारह महीने मिलकर करीब 354 दिन बनाते हैं, जो सूरज वाले साल से करीब 11 दिन कम पड़ते हैं।

इस कमी को यूँ ही छोड़ दिया जाए तो दस बरस के भीतर नया साल सर्दी से खिसककर पतझड़ में जा पहुँचेगा। इसलिए बीच-बीच में तेरहवाँ महीना जोड़ दिया जाता है, 19 साल में सात बार, और गिनती वापस सूरज के साथ बँध जाती है। नतीजा यह कि नया साल किसी एक तारीख़ पर नहीं टिकता, बल्कि करीब एक महीने चौड़ी खिड़की में इधर-उधर सरकता रहता है।

यह तरीक़ा भारतीय पंचांग से बहुत दूर नहीं है। वहाँ भी महीना चाँद से गिना जाता है, और वहाँ भी करीब हर तीसरे बरस अधिक मास जोड़कर गिनती को सूरज के साथ मिला लिया जाता है। इसीलिए होली और दिवाली की अंग्रेज़ी तारीख़ हर साल हिलती रहती है, और चीनी नया साल भी उसी वजह से टिककर नहीं बैठता।

एक पेच और जान लेने लायक़ है। पूरी चीनी कुंडली बनाने वाले कई ज्योतिषी जानवर का साल नए साल से नहीं, बल्कि लीचुन से शुरू करते हैं, जो परंपरा में बसंत का पहला दिन है और 4 फ़रवरी के आसपास पड़ता है। फ़रवरी के शुरुआती दिनों में जन्मे लोगों को इन दोनों तरीक़ों से अलग-अलग जानवर मिल सकते हैं, और इनमें से कोई भी ग़लत नहीं है।

जानवर के साथ चलने वाला तत्व

हर साल पाँच तत्वों में से एक भी लेकर आता है: लकड़ी, अग्नि, पृथ्वी, धातु और जल। एक तत्व लगातार दो साल टिकता है और फिर अगला उसकी जगह ले लेता है। बारह जानवरों को पाँच तत्वों से मिलाओ तो 60 अलग जोड़ बनते हैं। लकड़ी वाला ड्रैगन या धातु वाला चूहा साठ बरस में एक बार लौटता है, और इसी वजह से चीन में साठवाँ जन्मदिन बहुत बड़ा माना जाता रहा है।

तत्व अंग्रेज़ी साल के आख़िरी अंक से निकल आता है, बशर्ते जन्मदिन नए साल के बाद पड़ा हो: 0 और 1 धातु, 2 और 3 जल, 4 और 5 लकड़ी, 6 और 7 अग्नि, 8 और 9 पृथ्वी। इसी नियम से 2024 लकड़ी वाले ड्रैगन का साल था और 2026 अग्नि वाले घोड़े का।

हर साल यांग होता है या यिन, यानी पुरानी चीनी सोच की उन दो जोड़ीदार ताक़तों में से एक, जिनमें यांग सक्रिय पक्ष है और यिन ग्रहण करने वाला। ये दोनों बारी-बारी आते हैं, बिना एक भी अपवाद के। जानवरों का क्रम तय है, इसलिए यह बँटवारा भी हमेशा के लिए तय हो चुका है: चूहा, बाघ, ड्रैगन, घोड़ा, बंदर और कुत्ता हमेशा यांग रहते हैं, जबकि बैल, खरगोश, साँप, बकरी, मुर्गा और सूअर हमेशा यिन।

इन जानवरों से मतलब क्या निकाला जाता है

जानवर आगे की ख़बर नहीं देता, वह एक बनी-बनाई पहचान भर है। बैल को धीरज वाला और अपनी जगह से न हिलने वाला पढ़ा जाता है, बंदर को फुर्तीला और शरारती, साँप को कम बोलने वाला और गहरी नज़र वाला, घोड़े को बेचैन और लोगों में जल्दी घुल जाने वाला। ये कहानियों और पुराने पंचांगों से चली आ रही तस्वीरें हैं, कोई जाँची हुई खोज नहीं। इन्हें उसी तरह लो जैसे स्वभाव पर विरासत में मिली कोई भी बात: एक चश्मा, जो कभी सही बैठता है और कभी नहीं।

इस परंपरा में जोड़ी मिलाने का हिसाब सीधी ज्यामिति है। चक्र में जो जानवर चार क़दम की दूरी पर हैं वे आपस में जमते माने जाते हैं, और इससे चार तिकड़ियाँ बनती हैं: चूहा, ड्रैगन और बंदर; बैल, साँप और मुर्गा; बाघ, घोड़ा और कुत्ता; खरगोश, बकरी और सूअर। ठीक आमने-सामने पड़ने वाले, यानी छह क़दम की दूरी वाले जानवर टकराते माने जाते हैं: चूहा और घोड़ा, बैल और बकरी, बाघ और बंदर, खरगोश और मुर्गा, ड्रैगन और कुत्ता, साँप और सूअर।

जिस बरस तुम्हारा अपना जानवर लौटता है

तुम्हारा जानवर हर बारहवें साल फिर आ जाता है, यानी 12, 24, 36 और आगे इसी हिसाब से। चीनी रिवाज़ में इसे बनमिंगनियन कहते हैं, यानी अपने मूल जन्म वाला बरस, और इसे भाग्य वाला नहीं बल्कि उथल-पुथल वाला दौर माना जाता है। सोच यह है कि अपने ही चिह्न के ठीक नीचे खड़े होने से वह ध्यान खिंच आता है जो न खिंचे तो बेहतर।

इसका पारंपरिक इलाज लाल रंग है। लाल कमरबंद, लाल मोज़े या लाल भीतरी कपड़े, पूरे बरस पहने जाएँ, और अच्छा यह माना जाता है कि वे ख़ुद ख़रीदने के बजाय किसी और की तरफ़ से मिलें। यह उसी भाव से निभाया जाता है जिस भाव से यहाँ लोग बच्चे के कान के पीछे काला टीका लगा देते हैं, और निभाने वाले बहुत से लोग यह दावा भी नहीं करेंगे कि उन्हें इस पर सचमुच यक़ीन है।

तुम्हारे पास एक नहीं, चार जानवर हैं

साल वाला जानवर चार में से सिर्फ़ पहला है। पूरी परंपरा वाला पाठ, जिसे बाज़ी या चार खंभे कहते हैं, जन्म के साल, महीने, दिन और दो घंटे के उस टुकड़े को अलग-अलग जानवर और तत्व देता है जिसमें जन्म हुआ था। इनमें दिन वाला खंभा अक्सर वह माना जाता है जो इंसान को सबसे क़रीब से बताता है, और यही एक वजह है कि अकेला साल वाला जानवर कई लोगों को अपने ऊपर बैठता नहीं लगता।

घंटे वाला जानवर सबसे तेज़ बदलता है। चीनी दिन दो-दो घंटे के बारह टुकड़ों में बँटा है और हर टुकड़े पर उसी पुराने क्रम से एक जानवर का हक़ है, जिसकी शुरुआत रात 11 बजे से 1 बजे तक चलने वाले चूहे के पहर से होती है। इनमें से कुछ भी निकालने के लिए अकेले जन्म के बरस से काम नहीं चलता, पूरी जन्मतारीख़ चाहिए, और घंटे वाले के लिए जन्म का समय भी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेरा जन्म जनवरी में हुआ है, मेरा जानवर कौन सा हुआ?
लगभग पक्के तौर पर पिछले बरस वाला। चीनी नया साल कभी 21 जनवरी से पहले नहीं आया, इसलिए उससे पहले का हर जन्मदिन पिछले बरस के खाते में जाता है, और ज़्यादातर बरसों में पूरा महीना ही उधर पड़ता है। 1 जनवरी से गिनने वाली सूची पर भरोसा करने से पहले अपने जन्म बरस की चीनी नए साल की तारीख़ देख लो।
चीनी नया साल हर बार अलग तारीख़ पर क्यों आता है?
क्योंकि उसे अमावस्या तय करती है, और एक अमावस्या से दूसरी के बीच करीब 29.5 दिन बीतते हैं, जो सूरज वाले साल में पूरे-पूरे नहीं बँटते। कुछ न किया जाए तो तारीख़ हर बरस करीब 11 दिन पीछे खिसकती जाएगी। कुछ बरसों के अंतर पर जो अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, वह तारीख़ को एक ही झटके में करीब 19 दिन आगे सरका देता है, और इसी खींचतान से पूरी खिड़की बनती है।
क्या चीनी राशिचक्र और बारह राशियाँ एक ही चीज़ हैं?
नहीं। दोनों में बारह ख़ाने हैं और इसके आगे साझा कुछ ख़ास नहीं। मेष से मीन तक की राशियाँ एक बरस को महीने भर के बारह टुकड़ों में काटती हैं और देखती हैं कि उस वक़्त सूरज कहाँ था, जबकि चीनी जानवर बारह बरस के दौर को पूरे-पूरे साल में काटते हैं। दोनों तुम्हारे पास हैं और दोनों अलग बात पूछ रहे हैं।
क्या चीनी राशिचक्र बता देता है कि मेरे साथ क्या होगा?
यह स्वभाव बताने और साल भर के रीति-रिवाज़ चलाने की व्यवस्था है, भविष्य जानने की कोई परखी हुई विधि नहीं। पंचांगों में हर जानवर के लिए बरस भर का लेखा छपता ज़रूर है, और बहुत लोग उसे नए साल के मज़े और रस्म की ख़ातिर पढ़ते हैं। जानवर को अपने मिज़ाज पर बात करने का एक तरीक़ा मानो, आने वाले दिनों का सबूत नहीं।

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