हकीक, जिसे अंग्रेज़ी में एगेट कहा जाता है, प्रकृति में सबसे अधिक विविधता वाले पत्थरों में से एक है। यह लाल, भूरे, सलेटी, दूधिया सफ़ेद, नीले और हरे रंगों में मिलता है और इसकी सबसे पहचानी जाने वाली खूबी इसके भीतर बनी हुई गोलाकार धारियाँ हैं। ये परतें कहीं पारभासी होती हैं और कहीं लगभग पारदर्शी, जिससे एक ही पत्थर के भीतर कई शेड एक साथ दिखाई देते हैं।
इसका नाम सिसिली की उस अकाटेस नदी से जुड़ा माना जाता है, जिसके किनारे इसे सबसे पहले पहचाना गया था। भारतीय बाज़ारों में यह हकीक या सुलेमानी पत्थर के नाम से बिकता आया है और खंभात का इलाका सदियों से इसकी कटाई और पॉलिश का बड़ा केंद्र रहा है। यह पत्थर ज्वालामुखीय चट्टानों की खाली गुहाओं में धीरे-धीरे जमकर बनता है और खदान से निकालने के बाद इसे काटकर तराशा जाता है।
पुराने समय से हकीक सिर्फ़ गहनों तक सीमित नहीं रहा। इससे अंगूठियाँ, मालाएँ, मुहरें, कटोरियाँ और छोटी मूर्तियाँ बनाई जाती थीं, और मज़बूती के कारण यह पीढ़ियों तक चलता था। लोक विश्वास में इसे शांत करने वाला पत्थर माना जाता है और परंपरा कहती है कि यह तब सबसे अच्छा काम करता है जब त्वचा से सीधा स्पर्श करे।
हकीक पत्थर की विशेषताएँ
• पारंपरिक रूप से इसे पहनने वाले को अनजाने ख़तरों से बचाने वाला कवच माना जाता रहा है।
• लोक विश्वास में इसे नींद न आने की शिकायत और सुस्त पाचन के समय पास रखा जाता था।
• पुराने स्रोतों के अनुसार यह हालात को बिना अतिशयोक्ति के, जैसे हैं वैसे देखने में मदद करता है।
• इसे मज़बूत और भरी हुई ऊर्जा वाला पत्थर कहा गया है, जिसे दमखम और शारीरिक ताक़त से जोड़ा जाता रहा।
• माना जाता है कि हथेली में रखने पर यह अकड़ी हुई मांसपेशियों को ढीला छोड़ने का एहसास देता है।
• परंपरा में इसे जमा हुआ अतिरिक्त तनाव बाहर निकालने वाला पत्थर बताया गया है।
• पुरानी मान्यता है कि यह नए लोगों से घुलने-मिलने और अनजान माहौल में सहज होने में सहारा देता है।
• इसे हिम्मत बढ़ाने वाला पत्थर कहा जाता है, जो डर के सामने टिके रहने में मदद करता है।
• पुराने ग्रंथों में इसे साफ़ सोच और तर्क की पकड़ मज़बूत करने वाला बताया गया है।
• लोक परंपरा में इसे शरीर की सहनशक्ति और लसीका के बहाव से जोड़ा जाता रहा है।
• माना जाता है कि निम्न रक्तचाप की प्रवृत्ति वाले लोग इसे सहारे के तौर पर पास रखते थे।
• सदियों से इसे नज़र और बुरी नीयत से बचाव के लिए पहना गया, क्योंकि इसकी धारियाँ सबसे पहले ध्यान खींचती हैं।
• इसकी गरमाहट भरी ऊर्जा को कठिन दिनों में अच्छा पक्ष देख पाने से जोड़ा जाता है।
• लोक विश्वास में बच्चों की जेब में रखा गया हकीक उन्हें चिड़चिड़ेपन और झगड़े से दूर रखता है।
• परंपरागत रूप से इसे ख़ुशी और भीतरी ठहराव का पत्थर कहा गया है।
हकीक ज़मीन से जुड़ी सफलता और धैर्य का प्रतीक है। व्यापार करने वालों में इसे कमर से नीचे, जैसे जेब में रखने का चलन रहा है, और अंगूठी के रूप में इसे आत्मविश्वास बढ़ाने वाला माना जाता है। यह उन लोगों को भाता है जो रोज़मर्रा में ठहराव, सुरक्षा का एहसास और शांत मन चाहते हैं। यहाँ बताए गए उपयोग परंपरा और लोक विश्वास का हिस्सा हैं, ये डॉक्टरी सलाह का विकल्प नहीं हैं।
कठोरता स्तर: 6.5 - 7
रासायनिक संरचना: SiO₂
विशिष्ट गुरुत्व: 2.60 - 2.64
चक्र: मूलाधार, स्वाधिष्ठान, अनाहत
देखभाल: गुनगुने पानी और मुलायम ब्रश से साफ करें, फिर अच्छी तरह सुखाएँ। धूप से इसे नुकसान नहीं होता।
एमेथिस्ट क्वार्ट्ज़ परिवार का बैंगनी रत्न है, जिसे हिंदी में कटैला या जामुनिया भी कहा जाता है। इसका रंग हल्के लैवेंडर से लेकर गहरे बैंगनी तक जाता है और यह क्रिस्टल में मौजूद लोहे तथा प्राकृतिक विकिरण के असर से बनता है। अच्छे नमूनों में रंग एक जैसा फैला रहता है, जबकि कई पत्थरों में बैंगनी और सफ़ेद हिस्से एक साथ दिखते हैं।
इसका नाम यूनानी शब्द से आया है जिसका अर्थ है नशे से बचा हुआ। पुराने यूनान में मान्यता थी कि इस पत्थर का प्याला पीने वाले को होश में रखता है, इसलिए इसे संयम का पत्थर कहा गया। ब्राज़ील, उरुग्वे, ज़ाम्बिया और भारत इसके मुख्य स्रोत हैं, जहाँ यह ज्वालामुखीय चट्टानों की गुहाओं में बने बड़े क्रिस्टल गुच्छों के रूप में निकलता है।
चर्च और राजदरबार दोनों में यह लंबे समय तक प्रतिष्ठा का प्रतीक रहा। पत्थरों की परंपरा में इसे मन को शांत करने और ध्यान गहरा करने वाला रत्न माना जाता है। इसे अक्सर पढ़ने या ध्यान की जगह पर रखा जाता है और गले या उँगली में पहना जाता है। ध्यान रहे कि लंबी सीधी धूप इसका बैंगनी रंग फीका कर देती है।
एमेथिस्ट पत्थर की विशेषताएँ
• पारंपरिक रूप से इसे किसी भी आदत पर काबू पाने की कोशिश में सहारे का पत्थर कहा गया है।
• लोक विश्वास में इसे बेचैन मन को धीमा करने और नींद गहरी करने से जोड़ा जाता है।
• पुराने स्रोतों के अनुसार यह सिर के भारीपन और थकी हुई सोच को हल्का करता है।
• माना जाता है कि यह ध्यान लगाने की क्षमता बढ़ाता है, इसलिए इसे पढ़ाई की मेज़ पर रखा जाता रहा।
• परंपरा में इसे गुस्से के उबाल को ठंडा करने वाला पत्थर बताया गया है।
• पुरानी मान्यता है कि यह सपनों को याद रखने में मदद करता है।
• लोक परंपरा इसे भावनात्मक उतार-चढ़ाव के दौर में संतुलन देने वाला मानती है।
• माना जाता है कि यह अंतर्ज्ञान और भीतर की आवाज़ को साफ़ सुनने में सहायक है।
• पुराने स्रोतों में इसे शोक और गहरे दुख के समय सांत्वना देने वाला बताया गया है।
• लोक विश्वास में इसे त्वचा की देखभाल की परंपराओं से जोड़ा जाता रहा है।
• माना जाता है कि यह भीड़ और शोर के बीच अपनी जगह बनाए रखने का एहसास देता है।
• परंपरा में इसे रचनात्मक काम करने वालों के लिए प्रेरणा का पत्थर कहा गया है।
• पुरानी मान्यता है कि यह बुरे सपनों से बचाव के लिए तकिये के नीचे रखा जाता था।
• लोक परंपरा इसे बिना कारण की चिड़चिड़ाहट को शांत करने वाला बताती है।
एमेथिस्ट संयम, आत्मनियंत्रण और आध्यात्मिक ठहराव का प्रतीक है। यह उन लोगों के लिए उपयुक्त माना जाता है जो अपनी सोच को व्यवस्थित करना चाहते हैं, ध्यान का अभ्यास करते हैं या किसी आदत से बाहर निकलने की कोशिश में हैं। यहाँ बताए गए उपयोग परंपरा और लोक विश्वास का हिस्सा हैं, ये डॉक्टरी सलाह का विकल्प नहीं हैं।
कठोरता स्तर: 7
रासायनिक संरचना: SiO₂
विशिष्ट गुरुत्व: 2.65
चक्र: आज्ञा, सहस्रार
देखभाल: गुनगुने पानी और मुलायम ब्रश से साफ करें। लंबे समय तक सीधी धूप में न रखें, रंग फीका पड़ जाता है।
स्मोकी क्वार्ट्ज़ या धूम्र स्फटिक क्वार्ट्ज़ का वह रूप है जिसका रंग हल्के धुएँ जैसे भूरे से लेकर गहरे कॉफ़ी और लगभग काले तक जाता है। यह रंग प्राकृतिक विकिरण के लंबे असर से बनता है, जो क्रिस्टल की संरचना में मौजूद ऐलुमिनियम पर काम करता है। अच्छे नमूने पारभासी रहते हैं और भीतर से रोशनी छनकर निकलती है।
ब्राज़ील, स्विट्ज़रलैंड के आल्प्स, स्कॉटलैंड और मेडागास्कर इसके जाने-माने स्रोत हैं। स्कॉटलैंड में यह लंबे समय तक राष्ट्रीय पत्थर की तरह देखा गया और पारंपरिक पोशाक की सजावट में जड़ा जाता रहा। इसकी कठोरता क्वार्ट्ज़ जितनी ही है, इसलिए यह रोज़ पहनने के लिए मज़बूत है, पर लंबी सीधी धूप इसका गहरा रंग हल्का कर देती है।
पत्थरों की परंपरा में इसे ज़मीन से जोड़ने वाला पत्थर कहा जाता है। मान्यता है कि यह भारी और उलझी हुई ऊर्जा को नीचे की ओर बहा देता है, इसलिए इसे पैरों के पास, जेब में या कमर की पेटी में रखने का चलन रहा है। ध्यान के दौरान इसे हथेली में थामना भी एक पुराना अभ्यास है।
स्मोकी क्वार्ट्ज़ पत्थर की विशेषताएँ
• पारंपरिक रूप से इसे ज़मीन से जोड़ने वाला और मन को वर्तमान में टिकाने वाला पत्थर कहा गया है।
• लोक विश्वास में इसे डर और आशंका के घने दौर में पास रखा जाता था।
• पुराने स्रोतों के अनुसार यह उदासी के भारीपन को हल्का करने में सहारा देता है।
• माना जाता है कि यह गुस्से और झुँझलाहट को बाहर निकलने का रास्ता देता है।
• परंपरा में इसे कमर और पैरों के तनाव से जोड़कर देखा जाता रहा है।
• पुरानी मान्यता है कि यह नकारात्मक माहौल में ढाल का काम करता है।
• लोक परंपरा इसे बुरे सपनों के बाद ठहराव लौटाने वाला बताती है।
• माना जाता है कि यह किसी चीज़ को छोड़ देने की प्रक्रिया आसान बनाता है।
• पुराने स्रोतों में इसे व्यावहारिक सोच और ठोस योजना से जोड़ा गया है।
• लोक विश्वास में इसे लंबे कामकाजी दिन के बाद थकान उतारने वाला माना जाता है।
• माना जाता है कि यह अत्यधिक सोचने की आदत पर लगाम लगाता है।
• परंपरा में इसे घर के दरवाज़े के पास रखने का रिवाज़ रहा है।
• पुरानी मान्यता है कि यह शराब या तंबाकू छोड़ने की कोशिश में मनोबल देता है।
• लोक परंपरा इसे तेज़ रोशनी और भीड़ से थकी हुई इंद्रियों को आराम देने वाला बताती है।
• माना जाता है कि यह टूटी हुई एकाग्रता को दोबारा जोड़ने में मदद करता है।
स्मोकी क्वार्ट्ज़ स्थिरता, बचाव और भार उतार देने का प्रतीक है। यह उन लोगों को भाता है जो लगातार दबाव में काम करते हैं, जो ज़्यादा सोचने की आदत से परेशान हैं या जो गहरे रंग के, ज़मीनी एहसास वाले पत्थर पसंद करते हैं। यहाँ बताए गए उपयोग परंपरा और लोक विश्वास का हिस्सा हैं, ये डॉक्टरी सलाह का विकल्प नहीं हैं।
कठोरता स्तर: 7
रासायनिक संरचना: SiO₂
विशिष्ट गुरुत्व: 2.65
चक्र: मूलाधार
देखभाल: गुनगुने पानी और मुलायम ब्रश से साफ करें। लंबे समय तक सीधी धूप में न रखें, रंग फीका पड़ जाता है।
गार्नेट असल में एक अकेला खनिज नहीं, बल्कि आपस में जुड़े खनिजों का पूरा समूह है। सबसे परिचित रंग गहरा लाल है, पर यह नारंगी, गुलाबी, हरे, भूरे और लगभग काले रूपों में भी मिलता है। इसका नाम लातीनी शब्द से आया है जिसका अर्थ है दाने जैसा, क्योंकि लाल गार्नेट के दाने अनार के दानों जैसे दिखते हैं। हिंदी में इसे तामड़ा कहा जाता है।
यह पत्थर मज़बूत है और अच्छी चमक लौटाता है, इसलिए सदियों से गहनों में जड़ा जाता रहा है। रोमन काल में इससे मुहरें बनाई जाती थीं और मध्ययुगीन यूरोप में इसे यात्रियों का पत्थर कहा जाता था। चेक गणराज्य के बोहेमियाई गार्नेट, भारत, श्रीलंका, ब्राज़ील और अफ़्रीका के कई देश इसके प्रमुख स्रोत हैं।
पत्थरों की परंपरा में गार्नेट को ऊर्जा और जीवनशक्ति का रत्न माना जाता है। इसे अंगूठी या हार में त्वचा के पास पहनने का चलन रहा है और ठंडे मौसम में इसे शरीर को गर्माहट का एहसास देने वाला बताया गया है। धूप इसे नुक़सान नहीं पहुँचाती और सामान्य देखभाल में यह टिकाऊ रहता है।
गार्नेट पत्थर की विशेषताएँ
• पारंपरिक रूप से इसे रक्त संचार और शरीर की गर्माहट से जोड़ा जाता रहा है।
• लोक विश्वास में इसे थकान के लंबे दौर में ऊर्जा लौटाने वाला माना जाता है।
• पुराने स्रोतों के अनुसार यह यात्रा में सुरक्षा का ताबीज़ था।
• माना जाता है कि यह इच्छाशक्ति और काम पूरा करने की ज़िद मज़बूत करता है।
• परंपरा में इसे प्रेम और आकर्षण का पत्थर कहा गया है।
• पुरानी मान्यता है कि यह आत्मविश्वास की कमी को भरने में सहारा देता है।
• लोक परंपरा इसे दिल की धड़कन की सामान्य लय से जोड़कर देखती रही है।
• माना जाता है कि यह किसी संकट के बाद दोबारा खड़े होने की हिम्मत देता है।
• पुराने स्रोतों में इसे व्यापार में दृढ़ता का पत्थर बताया गया है।
• लोक विश्वास में इसे रचनात्मक जोश और नई कल्पनाओं से जोड़ा जाता है।
• माना जाता है कि यह टालमटोल की आदत तोड़ने में मदद करता है।
• परंपरा में इसे सर्दियों में हाथ-पैर की ठंडक के समय पास रखा जाता था।
• पुरानी मान्यता है कि यह ईर्ष्या और कड़वाहट को कम करके रिश्तों में गरमाहट लाता है।
• लोक परंपरा इसे लक्ष्य पर टिके रहने वाला अनुशासन का पत्थर मानती है।
गार्नेट जीवनशक्ति, निष्ठा और दृढ़ता का प्रतीक है। यह उन लोगों को उपयुक्त माना जाता है जो लंबे लक्ष्य पर काम कर रहे हैं, जिन्हें ऊर्जा की कमी महसूस होती है या जो गहरे लाल रंग की मज़बूत उपस्थिति पसंद करते हैं। यहाँ बताए गए उपयोग परंपरा और लोक विश्वास का हिस्सा हैं, ये डॉक्टरी सलाह का विकल्प नहीं हैं।
कठोरता स्तर: 7 - 7.5
रासायनिक संरचना: Fe₃Al₂(SiO₄)₃
विशिष्ट गुरुत्व: 3.4 - 4.3
चक्र: मूलाधार, स्वाधिष्ठान
देखभाल: गुनगुने पानी और मुलायम ब्रश से साफ करें, फिर अच्छी तरह सुखाएँ। धूप से इसे नुकसान नहीं होता।
जैस्पर सूक्ष्म दानों वाले क्वार्ट्ज़ का अपारदर्शी रूप है, जिसमें मिट्टी और लोहे के कणों की मिलावट रंग तय करती है। इसीलिए यह ईंट जैसे लाल, सरसों जैसे पीले, गहरे हरे, भूरे और सलेटी रंगों में मिलता है। इसकी असली ख़ूबी सतह के नक़्शे हैं, जो कहीं धारियों, कहीं धब्बों और कहीं किसी परिदृश्य जैसी आकृतियों में उभरते हैं।
इसका नाम पुरानी भाषाओं के उस शब्द से आया है जिसका अर्थ है चित्तीदार पत्थर। हर टुकड़ा अलग दिखता है, इसलिए इसकी कई किस्में अपने ही नाम से जानी जाती हैं, जैसे पिक्चर जैस्पर, ओशन जैस्पर और रेड जैस्पर। भारत, ब्राज़ील, मेडागास्कर, रूस और अमेरिका इसके प्रमुख स्रोत हैं।
चूँकि यह मज़बूत और अपारदर्शी है, इससे मालाएँ, हैंडल, ताबीज़ और नक़्क़ाशीदार वस्तुएँ बनती हैं। पत्थरों की परंपरा में इसे पोषण देने वाला पत्थर कहा जाता है, जो धीरे-धीरे और लंबे समय तक काम करता है। इसे रोज़ पहना जा सकता है और धूप इसका रंग नहीं बिगाड़ती।
जैस्पर पत्थर की विशेषताएँ
• पारंपरिक रूप से इसे लंबे कामों में सहनशक्ति बनाए रखने वाला पत्थर कहा गया है।
• लोक विश्वास में इसे पेट और आँतों की सामान्य लय से जोड़ा जाता रहा है।
• पुराने स्रोतों के अनुसार यह अचानक आने वाले तनाव को धीरे-धीरे नीचे लाता है।
• माना जाता है कि यह किसी काम को अधूरा छोड़ देने की आदत पर लगाम लगाता है।
• परंपरा में इसे रात की पाली में काम करने वालों के लिए उपयुक्त बताया गया है।
• पुरानी मान्यता है कि यह ज़मीन और प्रकृति से जुड़ाव का एहसास बढ़ाता है।
• लोक परंपरा इसे बुरे सपनों से बचाव के लिए तकिये के पास रखने की सलाह देती रही है।
• माना जाता है कि यह ईमानदारी से अपनी ग़लती स्वीकार करने का साहस देता है।
• पुराने स्रोतों में इसे शिकारियों और पहरेदारों का रक्षक पत्थर कहा गया है।
• लोक विश्वास में इसे लंबी बीमारी के बाद ताक़त लौटने के दौर से जोड़ा जाता है।
• माना जाता है कि यह अकेलेपन के एहसास को नरम करता है।
• परंपरा में इसे खिलाड़ियों और शारीरिक मेहनत करने वालों का पत्थर बताया गया है।
• पुरानी मान्यता है कि यह किसी लंबे विवाद में ठंडे दिमाग़ से टिके रहने में मदद करता है।
• लोक परंपरा इसे यात्रा के दौरान ऊब और थकान कम करने वाला मानती है।
जैस्पर धैर्य, सहनशीलता और ज़मीनी मज़बूती का प्रतीक है। यह उन लोगों के लिए उपयुक्त माना जाता है जो लंबी दौड़ के काम में लगे हैं, जिन्हें रोज़ का ढाँचा चाहिए या जो प्राकृतिक नक़्शों वाले पत्थरों की ओर आकर्षित होते हैं। यहाँ बताए गए उपयोग परंपरा और लोक विश्वास का हिस्सा हैं, ये डॉक्टरी सलाह का विकल्प नहीं हैं।
कठोरता स्तर: 6.5 - 7
रासायनिक संरचना: SiO₂
विशिष्ट गुरुत्व: 2.58 - 2.91
चक्र: मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपूर
देखभाल: गुनगुने पानी और मुलायम ब्रश से साफ करें, फिर अच्छी तरह सुखाएँ। धूप से इसे नुकसान नहीं होता।
जेड नाम दो अलग खनिजों के लिए इस्तेमाल होता है: जेडाइट और नेफ़्राइट। दोनों दिखने में मिलते-जुलते हैं, पर जेडाइट ज़्यादा दुर्लभ और चमकदार होता है, जबकि नेफ़्राइट अपनी असाधारण मज़बूती के लिए जाना जाता है। सबसे प्रसिद्ध रंग हरा है, पर यह सफ़ेद, पीला, लैवेंडर, भूरा और काला भी होता है।
चीन में जेड को पाँच हज़ार साल से स्वर्ग का पत्थर माना जाता रहा है और वहाँ इसे सोने से भी ऊँचा दर्जा दिया गया। म्यांमार जेडाइट का सबसे बड़ा स्रोत है, जबकि नेफ़्राइट न्यूज़ीलैंड, कनाडा, रूस और चीन से मिलता है। न्यूज़ीलैंड की माओरी परंपरा में इससे बने पेंडेंट पीढ़ी दर पीढ़ी सौंपे जाते हैं।
इसकी रेशेदार भीतरी संरचना इसे इतना सख़्त बनाती है कि प्राचीन काल में इससे औज़ार और हथियार तक बनाए जाते थे। पत्थरों की परंपरा में इसे संतुलन और सौभाग्य का रत्न कहा जाता है और इसे कंगन के रूप में पहनना सबसे प्रचलित तरीक़ा है।
जेड की विशेषताएँ
• पारंपरिक रूप से इसे सौभाग्य और लंबी उम्र का प्रतीक माना जाता रहा है।
• लोक विश्वास में इसे अत्यधिक भावनाओं को समतल करने वाला बताया गया है।
• पुराने स्रोतों के अनुसार यह हथेली में गरम होकर आराम का एहसास देता है।
• माना जाता है कि यह गुर्दों और शरीर के जल संतुलन की परंपराओं से जुड़ा है।
• परंपरा में इसे शिक्षकों और वक्ताओं के लिए उपयुक्त बताया गया है।
• पुरानी मान्यता है कि यह डर के क्षणों में आत्मविश्वास लौटाता है।
• लोक परंपरा इसे न्यायप्रिय सोच और निष्पक्षता से जोड़ती रही है।
• माना जाता है कि यह सफलता के बाद अहंकार को क़ाबू में रखता है।
• पुराने स्रोतों में इसे दाँतों और हड्डियों की देखभाल से जोड़ा गया है।
• लोक विश्वास में इसे यात्रा में सुरक्षा का ताबीज़ माना जाता है।
• माना जाता है कि यह सपनों को शांत और सुखद बनाता है।
• परंपरा में इसे परिवार में सामंजस्य बनाए रखने वाला पत्थर कहा गया है।
• पुरानी मान्यता है कि यह मेहनत का उचित फल मिलने तक धैर्य देता है।
• लोक परंपरा इसे रोज़ पहनने लायक़ संतुलन का पत्थर मानती है।
जेड संतुलन, बुद्धिमानी और शांत सौभाग्य का प्रतीक है। यह उन लोगों को भाता है जो रोज़मर्रा में ठहराव चाहते हैं, जो निष्पक्ष निर्णय लेने की ज़िम्मेदारी उठाते हैं या जो हरे रंग की गहरी, शांत आभा पसंद करते हैं। यहाँ बताए गए उपयोग परंपरा और लोक विश्वास का हिस्सा हैं, ये डॉक्टरी सलाह का विकल्प नहीं हैं।
कठोरता स्तर: 6 - 7
रासायनिक संरचना: NaAlSi₂O₆ / Ca₂(Mg,Fe)₅Si₈O₂₂(OH)₂
विशिष्ट गुरुत्व: 2.90 - 3.38
चक्र: अनाहत
देखभाल: गुनगुने पानी और मुलायम ब्रश से साफ करें, फिर अच्छी तरह सुखाएँ। धूप से इसे नुकसान नहीं होता।